शिक्षा एक ऐसा हथियार जिसके प्रहार से ही खत्म होगी गरीबी और भुखमरी : सोनू सूद

लॉकडाउन में 7.5 लाख भारतीयों को सुरक्षित घर पहुंचाने वाले फिल्म अभिनेता सोनू सूद एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल आए। किसी सेलिब्रिटी के भोपाल पहुंचने के बाद आम तौर पर भोपाली फोटो या सेल्फी क्लिक करने के लिए क्रेजी रहते हैं। रविवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा था, लेकिन इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि साेनू बार-बार सिक्योरिटी का घेरा तोड़कर आम लोगों के साथ खुद ही फोटो खिंचवा रहे थे। 

शाम को फ्लाइट से लौटते समय उन्होंने 20 मिनट केवल फैन्स के साथ फोटो खिंचवाए। बड़ी विनम्रता के साथ हर व्यक्ति को आगे आने का मौका दिया। इस दौरान लड़कियों का एक ग्रुप भी सोनू के साथ सेल्फी क्लिक करने की इच्छा लिए उनके पास आना चाह रहा था, लेकिन भीड़ के कारण लड़कियां आगे नहीं आ पा रही थीं। ऐसे में सोनू ने खुद आगे बढ़कर लड़कियों के साथ सेल्फी ली। सोनू का ऐसा निराला अंदाज देख एयरपोर्ट पर मौजूद फैन्स के अलावा सिक्योरिटी भी अचरज में पढ़ गई। 

दिन भर की भागमभाग के बाद सोनू ने वापिस लौटते हुए Agnito Today से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने मन में चल रहे कई सामाजिक प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया।    

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जल्दी ही शुरू करूंगा ई क्लास : 
देश में कई बच्चे आज भी ऐसे हैं, जिन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती है। देश के कई इलाकों में आज भी बहुत गरीबी है। ऐसे में सोशल प्लेटफॉर्म पर एक वर्चुअल ई-क्लास खोलने की तैयारी में हूं। इसके बारे में आप लोगों को जल्दी ही जानकारी मिलेगी। इस ऑनलाइन क्लास में अलग-अलग सब्जेक्ट्स के लैक्चर उपलब्ध रहेंगे। 

मेरा मानना है कि शिक्षा एक ऐसा हथियार है। जिससे हम देश में फैली गरीबी, भुखमरी और अन्य बुराईयों को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं। यही कारण है कि मैं नि:शुल्क शिक्षा के लिए पहला कदम उठा रहा हूं। 

(फैन्स के सवालों के जवाब देते हुए सोनू सूद।)

माता-पिता से ही सीखा सेवा करना : 
किसी को परेशानी में देखकर उसकी मदद करना ये एकदम से नहीं हुआ है, ये मेरे डीएनए में ही है। असल में माता-पिता के संस्कार ही हैं। उन्होंने हमेशा किसी न किसी जरूरतमंद की मदद करना सिखाया है। लॉकडाउन के दौरान भी ऐसा ही हुआ। भूखे-प्यासे सैकड़ों किमी का सफर करने वाले लोगों को जब खाना देने पहुंचा, तो किसी ने कहा, "भैया दस दिन के खाने का ही इंतजाम कर दीजिए। पैदल घर जा रहे हैं और कोई साधन भी नहीं है।" ऐसे में लोगों को बस के माध्यम से घर पहुंचाने का विचार आया। 

यहीं से लोगों को बस से घर पहुंचाने का काम शुरू किया। बाद में यही जुनून बन गया। इसी जुनून की बदौलत लोगों की मदद कर सका। बसों के बाद फिर ट्रेन और फ्लाइट से भी लोगों को घर पहुंचाया। लोग घर पहुंचकर खबर देते थे। उस समय मन को बहुत शांति मिलती थी। 

(बिट्‌टन मार्केट में आयोजित एक कार्यक्रम में सोनू सूद को स्मृति चिन्ह भेंट करते भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा)

किसी एक की मदद करो, हजार की अपने आप होगी : 
किसी भी जरूरत मंद की मदद कीजिए। आप को पता ही नहीं लगेगा कि कब आप सैकड़ाें और फिर हजारों लोगों की मदद कर देंगे। दरअसल यह सब ऊपर वाला ही करवाता है। लॉकडाउन में भगवान ने मुझे जिंदगी की सबसे कठिन फिल्म को करने को कहा। इस दौरान फिल्म रियल लाइफ की थी। मैं मुख्य किरदार था और डायरेक्टर स्वयं भगवान थे। 

मैं फिल्मों में कैसा रोल करता हूं, यह डिसाइड करना फैन्स का काम है। इस रोल को भी फैन्स ही डिसाइड करेंगे कि मैंने कैसा रोल किया है। ईश्वर से यह प्रार्थना भी करता हूं कि ऐसे रोल मुझे भविष्य में करने का मौका दे। 

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कुछ नहीं कर सकते तो ब्लड डोनेट करें :
मैं लोगों को ब्लड डोनेट करने के लिए भी प्रेरित करता हूं। DKMS-BMST नामका एक एनजीओ है। जो ब्लड कैंसर, एनीमिया और ब्लड से जुड़े डिसऑर्डर में लाेगों की मदद करता है। मैं इसी एनजीओ क साथ जुड़कर रक्तदान के लिए लाेगों को जागरूक कर रहा हूं। आप भी यदि कुछ नहीं कर सकते हैं, तो रक्तदान कीजिए। ये भी एक तरह की सेवा ही है।

सेवा किसी भी तरह से की जा सकती है। जरूरी नहीं है कि जब आपके पास पैसे हों आप तभी सेवा करें। गुरुद्वारे में लंगर बंटवाने में हेल्प कीजिए। नदी-तालाबों को साफ करने में मदद कीजिए। पेड़ लगाएं या उन्हें पानी दें। मदद करने के बहुत से तरीकें हैं। इन्हें करने से आपको सुकून ही मिलेगा।