साइकिलिंग में टाइमिंग की मुश्किल को खत्म करने शहर की लेडीस ने बनाया पावनी

घर का रोजाना का काम और फिर ऑफिस और वहां से वापिस घर आकर फिर से घर का काम। इतना काम करने के बाद भी भारतीय महिलाओं को अपने शौक के लिए समय नहीं मिल पाता है और यह शौक साइकिलिंग का हो तो समय निकालना नामुमकिन हो जाता है, लेकिन इसी नामुमकिन को मुमकिन में बदलने का काम भोपाल का "पावनी लेडीज साइकिल ग्रुप" कर रहा है। 

21 दिसंबर 2020 को अस्तित्व में आए पावनी ग्रुप से अब तक 23 से ज्यादा लेडी साइकिल राइडर जुड़ चुकी है। इस ग्रुप का काम लेडीस के सुविधानुसार साइकिल राइड का आयोजन करना है। हालांकि ग्रुप अब तक तीन ही साइकिल मैराथन आयोजित कर चुका है। लेकिन इस ग्रुप की लगभग सभी साइकिल राइडर प्रो लेवल की एथलीट हैं। इसलिए ग्रुप हेड बिंदिया खर्ब को भरोसा है कि जल्दी ही कुछ बड़े इवेंट्स का आयोजन भी ग्रुप द्वारा किया जाएगा। 

सुबह-सवेरे साइकिलिंग के लिए बनाया पावनी : 


बिंदिया बताती हैं कि साइकिलिंग करते हुए उन्हें लगभग 4 साल का समय हो गया है। इस दौरान वे मेल राइडर्स के साथ साइकिलिंग करती रहीं। बिंदिया के अनुसार पुरुष सुबह देर से साइकिलिंग शुरू करते हैं और साइकिलिंग के दौरान कई बार चाय और नाश्ते पर भी काफी समय खर्च कर देते हैं। महिलाओं के लिए यहीं थोड़ी मुश्किल शुरू होती है। क्योंकि सुबह के समय उन्हें घर पहुंचकर सबके लिए नाश्ता और अन्य काम भी करने होते हैं।   

लड़कियों को प्रोत्साहित करना मेरा मुख्य उद्देश्य :


58 साल की शुभ्रा गोयल शिक्षिका हैं और मप्र महिला क्रिकेट टीम की अंडर-16 और अंडर-19 की सिलेक्टर भी हैं। साथ ही स्वीमिंग में गोल्ड मेडिलिस्ट हैं। वे बताती हैं कि वो सबकुछ जो मैंने ताउम्र सीखा है, वो बच्चों को सिखा सकूं। बस यही अब मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य है। आज भले ही हम 21वीं सदी में हैं, लेकिन आज भी जो लड़की कुछ अच्छा कर रही है, वो बहुत मुश्किलों का सामना करते हुए ही कर पाती है। इसलिए इन्हें प्रमोट करना ही मेरा उद्देश्य होता है। 

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मालती ने पहली बार में की 21 किमी की राइडिंग : 


60 साल की मालती इंदौरिया ने हाल ही में साइकिलिंग करना शुरू किया है। वाे बताती हैं कि बचपन से ही कुछ अलग करने का जज्बा रहा है, लेकिन अपने लिए कभी समय ही नहीं निकाल सकी। बचपन से ही स्पोर्टस का शौक रहा। इस दौरान उन्होंने मलखंभ, साइकिलिंग और जिमनास्टिक जैसे स्पोर्टस में हिस्सा लिया, लेकिन अपने खेल के शौक को वो आगे पूरा न कर सकीं। इसलिए पावनी के साथ जुड़ी और पहली ही राइड में मालती ने 21 किमी कम्पलीट कर सबको अचरज में डाल दिया। 

बचपन से ही साइकिल चलाती हैं आभा :


जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में नर्स आभा बताती हैं कि बचपन से ही वो साइकिल चलाती रही हैं। बचपन में पिता की साइकिल को लेकर तीन लोगों के साथ स्कूल जाती थीं। यही बाद में शौक बन गया। आभा अब रोजाना साइकिल चलाती हैं। अक्सर वीआईपी रोड और अयोध्या बायपास पर वे प्रैक्टिस करती नजर आ जाएंगी। आभा बताती हैं कि साल भर में उन्होंने अपना 5 किलो वजन भी साइकिलिंग के बदौलत कम कर लिया है।

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फिजिकल और मेंटल फिटनेस में हुआ सुधार :


12 घंटे में 200 किमी और 19 घंटे में 300 किमी कम्पलीट कर चुकी शाम्भवी बताती हैं कि साइकिलिंग के बाद उनका मन एकाग्र हुआ है। वे ज्यादा एकाग्रता से कोई भी काम कर सकती है। फायर फॉक्स की हाइब्रिड साइकिल चलाने वाली शाम्भवी के अनुसार साइकिलिंग से मेंटल फिटनेस के साथ फिजिकल फिटनेस में भी गजब का सुधार हुआ है।

 

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