भोपाल की एक तिहाई आबादी पी रही सीवेज मिला पानी, कैग की रिपोर्ट में खुलासा 

फीकल कॉलीफॉर्म युक्त पानी पी रहे लोग : 
राजधानी भोपाल के अधिकांश क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता पीने लायक नहीं है। इसका खुलासा CAG (Comptroller and Auditor General of India) ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के अधिकांश जगहों में आबादी फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया युक्त पानी पी रही है, इसका मतलब नगर निगम द्वारा जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसमें सीवेज मिल रहा है। भोपाल की तरह इंदौर में भी 5.33 लाख लोग फीकल कॉलीफॉर्म युक्त जल पीने को मजबूर हैं।
इस पानी को पीने से डायरिया सहित पेट की कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि लंबे समय तक इस दूषित पानी का सेवन किया जाए, तो आंत की कई गंभीर बीमारियां भी व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती हैं।  
 
कैग की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर वर्ष 2013-2018 के बीच कई जगह से पानी के नमूने लिए गए, जिसका परीक्षण करवाने पर यह जानकारी निकल कर सामने आई। साथ ही अगस्त एवं सितंबर 2018 में पानी के 30 नमूने लिए गए, जिसमें फीकल कॉलीफॉर्म पाया गया। इस रिपोर्ट को विधानसभा में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। 

क्या होता है फीकल कॉलीफॉर्म : 
फीकल कॉलीफॉर्म एक प्रकार का जीवाणु है, जो गर्म खून वाले प्राणियों की आंतों में पाया जाता है। इसका उपयोग पानी की माइक्रोबायोलाॅजिकल स्टडी के दौरान एक पैरामीटर के रूप में किया जाता है।
यह एक विशिष्ट प्रकार के बैक्टीरिया का एक ग्रुप होता है, जो पानी में मानव और पशु मल, मिट्टी, सड़ी हुई सब्जियों और सीवेज के जरिए पहुंचता है। आमतौर पर यह पानी को ट्रीट करने पर खत्म हो जाता है। साथ ही जिन लोगों का इम्मयून सिस्टम कमजोर है, उन्हें गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। 

क्या कारण है पानी के प्रदूषित होने का :
नगर निगम द्वारा जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसके कनेक्शन नालियों से होकर ही लोगों के घरों तक पहुंचते हैं। इन कनेक्शन में जगह जगह लीकेज होने के कारण सीवेज वॉटर सीधे पीने के पानी में मिल जाता है।
इसके अलावा ओवरहेड टैंकों की सफाई भी नियत समय पर नहीं हो पा रही है, जिसके कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि नगर निगम जहां पानी को उपचारित करता है। वहां भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही हो, जिसका नतीजा आम आदमी को बीमार होकर चुकाना पढ़ रहा है। 

(वर्ष 2013 से 2018 के बीच प्रदूषित पानी से बीमार हुए लोगों के आंकड़े, BMC : Bhopal Municipal Corporation )
(C : बीमार, D: मृत्यु)
किन इलाकों में सप्लाई हो रहा है प्रदूषित पानी : 
कैग की रिपोर्ट की मानें तो पुराने भोपाल के वार्ड 11 से लेकर वार्ड 24 तक लगभग 9 लाख आबादी इसी दूषित भूजल को पीने के लिए मजबूर है। भोपाल के चार जोन के 14 वार्ड दूषित जल की सप्लाई से प्रभावित हैं।
जोन-2 का वार्ड 21 जोन-3 का वार्ड 11, 12, 13, 14 वहीं जोन-4 के वार्ड 15, 16, 17, 18, 20 और जोन-5 के वार्ड 19, 22, 23, 24 के 8 लाख 95 हजार लोग इसी फीकल कॉलीफॉर्म युक्त दूषित जल का रोजाना सेवन करते हैं।
यही क्षेत्र पुराना भोपाल कहलाता है और यहां की सारी वॉटर सप्लाई नालियों से होकर गुजरती है, जिसके कारण सीवेज वॉटर सीधे पीने का पानी में मिल रहा है। 

समय पर नहीं होती है पानी की टंकियों की सफाई : 
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राजधानी भोपाल की 136 ओवरहेड के भौतिक परीक्षण के दौरान 23 की सफाई नहीं की गई थी। जबकि 13 की सफाई लॉग बुक अपडेट नहीं थी।
नगर निगम द्वारा इन सभी ओवरहेड टैंक को नियमित अंतराल से यानि 6 माह में एक कम से कम एक बार साफ किया जाना चाहिए। कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कैग ने संयुक्त रूप से इन्हीं ओवरहेड टैंक, जल शोधन संयंत्र और उपभोक्तओं के घरों से जल के नमूने लेकर राज्य अनुसंधान प्रयोगशाला भोपाल में इनका परीक्षण कराया, जिसमें पानी में फीकल कॉलीफॉर्म पाए जाने की पुष्टि हुई।

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