नंदा देवी जात्रा पर केंद्रित प्रदर्शनी 14 जनवरी से मानव संग्रहालय में

उत्तराखंड में नंदा देवी पर्वत शिखर, रूपकुंड व हेमकुंड नंदा देवी के प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हिमालय पुत्री के रूप में हेमवती का उल्लेख मिलता है। जिनमें शैलपुत्री नंदा को योग माया व शक्ति स्वरूपा का नाम दिया गया है। मां नंदा को सुख समृद्धि देने वाली हरित देवी भी माना गया है।

ये जानकारी डॉ. आरएम नयाल द्वारा इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय में बुधवार को दी गई। डॉ. नयाल ने बताया कि 14 जनवरी से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में मां नंदा देवी की जात्रा (यात्रा) पर केन्द्रित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।

मां नंदा के नाम हैं कई पर्वत श्रंखलाएं : 


मां नंदा देवभूमि उत्तराखंड की अगाध आस्था का पर्याय है। यही कारण है कि यहां कई नदियों, पर्वत श्रंखलाओं और नगरों के नाम भी मां नंदा के नाम पर रखे गए हैं।  मां नंदा की पूजा शक्ति स्वरूपा मां पार्वती के रूप में की जाती है। नंदा देवी मेला भाद्र माह की शुक्ल षष्ठी से प्रारंभ होता है। इसी दिन मा नंदा की पूजा की जाती है।
 
देवी का अवतार जिस पर होता है उसे देवी का डंगरिया कहा जाता है। मां नंदा की पूजा के लिए केले के वृक्षों से मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। केले के वृक्षों के चयन के लिए डंगरिया हाथ में चावल और पुष्प लेकर उसे केले के वृक्षों की ओर फेंकते हैं। जो वृक्ष हिलता है उसकी पूजा कर उसे मां के मंदिर में लाया जाता है।
 
देवी की मूर्तियों के निर्माण का कार्य सप्तमी के दिन से शुरू होता है। जबकि अष्टमी को मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इस दौरान नंदा देवी परिसर में भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है |इस जात्रा में हजरों लोग शामिल होते है | इस प्रदर्शनी में जात्रा से सम्बंधित अनेक  प्रादर्श, छायाचित्र वेशभूषा वाद्ययंत्र आदि देखने को मिलेंगें |

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