दो साल में भी पूरा नहीं हो सका भोपाल की सबसे खतरनाक सड़क का काम 

मिसरोध से समरधा के बीच 6 किमी लंबी सड़क का काम दो साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। एमपीआरडीसी ने अक्टूबर 2018 के बाद इस सड़क का निर्माण करना शुरू किया था, लेकिन दो साल बाद भी सड़क पूरी नहीं हाे सकी है, जिसके कारण यहां से निकलने वाले वाहनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही यहां स्थित कॉलोनी के लोगों को भी परेशानी हो रही है। इस सड़क के आसपास दो दर्जन से अधिक काॅलोनियां स्थित हैं, लेकिन फिलहाल रहवासी सड़क निर्माण की धीमी गति से परेशान हैं। 

जबलपुर तक बनना है सड़क : 
एमपीआरडीसी को जबलपुर तक इस सड़क को बनाना है। सड़क तीन फेज में बननी है, जिसमें पहले फेज में भोपाल से लेकर ओबेदुल्लागंज तक सड़क बनना थी, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के कारण सड़क का काम रुक गया और कमलनाथ सरकार के दौरान भी सड़क निर्माण की गति तेज नहीं थी।
हालांकि भाजपा सरकार के आने के बाद सड़क निर्माण तेज हुआ है, लेकिन रहवासियों का कहना है। इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

राजधानी की सबसे खतरनाक सड़क का खिताब : 
इस सड़क से होकर रोजाना जबलपुर, बैतूल, खंडवा, पचमढ़ी, होशंगाबाद और इटारसी के लिए सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। साथ ही पास में मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया होने की वजह से यहां से दिन भर भारी वाहनों का निकलना जारी रहता है।
साथ ही होशंगाबाद की तरफ से आने वाले रेत के डंपर भी इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। इनके अलावा भोपाल से ओबोदुल्लागंज के बीच चलने वाली निजी बसें भी इसी सड़क पर दौड़ती हैं। दिनभर निकलने वाले तेज रफ्तार वाहनों के कारण इस सड़क का निर्माण कार्य जरूरी हो गया था।  

तीन प्वाइंट को डेथ प्वाइंट की उपाधि : 
सड़क के तीन प्वाइंट को डेथ प्वाइंट का खिताब रहवासियों ने दिया था। 11 मील चौराहे पर अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं के कारण इसे सबसे खतरनाक स्थान माना गया था। वहीं इंडस टाउन फेस-1 का गेट भी दुर्घटनाओं का गढ़ रहा है, जहां कई रहवासी भारी वाहनों की चपेट में आकर दुर्घटनाओं का शिकार हुए। कोलार थाने में पदस्थ एक पुलिसकर्मी की मौत भी यहीं दुर्घटना में हुई थी। 
पाल ढाबे के सामने भी अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती थीं। यहां एक संकरी पुलिया को दो पहिया वाहन चालक नहीं देख पाते थे और दुर्घटना का शिकार हो जाते थे। 
स्ट्रीट लाइट और सर्विस रोड की मांग : 
रहवासी इस खराब सड़क पर सालों से स्ट्रीट लाइट और सर्विस रोड की मांग करते चले आ रहे हैं। हालांकि एमपीआरडीसी के प्लान में रहवासियाें के लिए अलग सर्विस रोड का प्रावधान है, लेकिन काम की सुस्त रफ्तार इस मांग को पूरा नहीं होने दे रही।
वहीं स्ट्रीट लाइट के लिए रहवासियों को अभी और लंबा इंतजार करना होगा। हालांकि अक्टूबर 2018 से पहले की खतरनाक सड़क से लोगों को छुटकारा जरूर मिल गया है।

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