900 साल पुरानी परमार कालीन प्रतिमाओं की पूजा करता है भोज नगर गांव 

होशंगाबाद रोड स्थित रतनपुर क्षेत्र से 6 किमी की दूरी पर स्थित भोज नगर ग्राम में पुरातत्व विभाग को 7 वर्ष पूर्व खुदाई के दौरान 11वीं सदी में बना पूरा का पूरा मंदिर मिला था। इसके साथ कई अन्य प्रतिमाएं और एक अन्य मंदिर क अवशेष भी मिले थे। इसमें से ज्यादातर प्रतिमाएं आज संरक्षित करने लायक स्थिति में नहीं है, लेकिन यहां से मिली 6 बेशकीमती प्रतिमाओं को पुरातत्व विभाग ने अपने कब्जे में लेकर संरक्षित कर लिया था।  


गांव में रहने वाले बुजुर्गों के अनुसार वे अपने दादा-परदादा से यहां स्थित प्राचीन मंदिर के किस्से अक्सर सुनते रहा करते थे। गांव में सैकड़ों वर्षों से यहां मंदिर होने की किवदंती थी, लेकिन 7 साल पहले एक किसान को अपने खेत में जुताई के दौरान कुछ प्राचीन पत्थर मिले, जिसकी जानकारी अधिकारियों को देने के बाद पूरा का पूरा मंदिर ही हम सब लोगों के सामने आ गया। 

बुजुर्ग सुनाते थे परमार राजा भोज के किस्से : 
रतनपुर गांव से कोलार को जाने वाली सड़क से एक रास्ता मंडीदीप की तरफ जाता है। इसी से होकर भोज नगर गांव तक पहुंचा जा सकता है। इस गांव के आसपास परमार समाज के लोग सदियों से रहते आ रहे हैं। इन्हीं लोगों के अनुसार इस गांव के बुजुर्ग अक्सर परमार राजा भोज के किस्से सुनाते थे और इस क्षेत्र में एक मंदिर होने की बात कहा करते थे। 


7 साल पहले जैसे ही इस जगह पर मंदिर के अवशेष एक किसान को मिले तो यहां लगे पेड़ों को काटा गया और मिट्‌टी हटने के बाद चारों ओर एक प्राचीन मंदिर के अवशेष बिखरे हुए थे। खुदाई में मिले इस परमार कालीन मंदिर के साथ शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थीं।

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बेशकीमती प्रतिमाएं होती हैं संरक्षित : 
पुरातत्वविद डॉ. रमेश यादव बताते हैं कि खुदाई के दौरान मिली किसी प्राचीन प्रतिमा के निर्माण काल, उसकी प्रकृति, शैली, आकार और प्रकार के आधार पर उनकी कीमत का आंकलन होता है। मूर्तियों की जांच करने के बाद जो प्रतिमाएं संरक्षित करने लायक होती हैं। उन्हें पुरातत्व विभाग अपने संरक्षण में ले लेता है। 


पुरातत्वविद डीके माथुर के अनुसार उस दौरान खुदाई में मिलीं 6 बेशकीमती प्रतिमाओं को पुरातत्व विभाग ने तुरंत अपने कब्जे में लेकर मप्र पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित कर दिया था। अन्य प्रतिमाओं की स्थिति संरक्षित करने लायक नहीं थी और स्थानीय लोगों की इनके प्रति विशेष श्रद्धा है। इसलिए इन्हें यही छोड़ दिया गया। 

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खुदाई में मिले थे दो मंदिरों के अवशेष : 
डॉ. यादव के अनुसार इस स्थान पर खुदाई के बाद एक मंदिर मिला था। साथ ही एक अन्य मंदिर के बिखरे हुए अवशेष मिले थे। इसके अलावा वाराह अवतार, नंदी और शिव मंदिर का गर्भ गृह यहां मौजूद है। खुदाई के बाद पुरातत्व विभाग द्वारा जो प्रतिमाएं यहां छोड़ी गई हैं। गांव के लोगों की उनके प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था है।


इस स्थान पर मौजूद मंदिर के संपूर्ण अवशेष के साथ दूसरे मंदिर के बिखरे हुए अवशेष और कई अन्य प्रतिमाएं यहां देखी जा सकती हैं। जिन पर 900 साल पुरानी नक्काशी भी साफ देखी जा सकती है। 

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