कोरोना काल में बीपी-शुगर पेशेंट्स सहित रेग्युलर ब्लड डोनर्स ने डाेनेट किया 128 यूनिट ब्लड 

कोरोना काल में जहां लोग डर के कारण एक-दूसरे का चेहरा भी नहीं देख पा रहे थे। ऐसे में नवरचना सेवा संस्थान के वॉलेंटियर्स ने मार्च से लेकर अगस्त तक 128 यूनिट ब्लड डोनेट कर रिकार्ड कायम किया है। शहर में रक्तदान के क्षेत्र में कार्य कर रही इस अग्रणी संस्था ने ब्लड के अलावा कोविड पेशेंट्स के लिए प्लाजमा और एसडीपी का भी इंतजाम किया। संस्था के सदस्यों ने एक कॉल पर कम से कम समय में रेयर ब्लड ग्रुप भी पेशेंट्स के लिए अरेंज कर दिया।

18 साल के अनुज चतुर्वेदी ने जन्मदिन पर किया रक्तदान : 
आम तौर पर 18 साल से कम उम्र के किशोर रक्तदान नहीं कर सकते हैं। लेकिन संस्था के कार्यों को शुरुआत से ही देख रहे अनुज चतुर्वेदी कोरोना काल में ही 18 साल के हुए। ऐसे में डोनर को जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने जन्मदिन के दिन ही रक्तदान कर मिसाल कायम की। अनुज ने बालिग होते ही समाज के प्रति अपनी जवाबदारी समझते हुए रक्तदान किया।

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बीपी और शुगर पेशेंट्स भी डोनेट करते हैं रक्त : 

नवरचना के सचिव नीरव चतुर्वेदी बताते हैं कि रेग्युलर डोनर्स के अलावा संस्था के सदस्य बीपी और शुगर पेशेंट्स को भी रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। नीरव के अनुसार यदि किसी बीपी पेशेंट्स का बीपी नॉर्मल है और डायबिटीज के पेशेंट्स की शुगर नॉर्मल है, तो वे लोग रक्तदान कर सकते हैं। नीरव के अनुसार बीपी और शुगर पेशेंट्स द्वारा रक्तदान करने से देश में रक्तदान का प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। 


रक्तदान से नहीं घबराएं : 
रेडक्रॉस हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ओपी श्रीवास्तव बताते हैं कि लोगों को रक्तदान के प्रति किसी तरह की भ्रांति नहीं रखना चाहिए। रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती, बल्कि रक्तदान करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। बीपी और डायबिटीज के पेशेंट्स भी ब्लड प्रेशर और शुगर की सामान्य स्थिति पर रक्तदान कर सकते हैं।

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नि:स्वार्थ भाव से करते हैं सहायता : 
संस्था के अध्यक्ष राजकमल चतुर्वेदी बताते हैं कि संस्था के सभी सदस्य नि:स्वार्थ सेवा के भाव से आपस में जुड़े हुए हैं। किसी जरूरतमंद को समय पर रक्त उपलब्ध हो जाए यह सोचकर ही 7 साल पहले इस संस्था को शुरू किया गया था। शुरुआत में डोनर्स ढूंढने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे लोग बढ़ते गए। आज किसी भी ग्रुप का ब्लड एक से दो घंटे के दौरान उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही इस काम को करने के लिए न तो कोई सरकारी सहायता और न ही किसी तरह का चंदा लिया जाता है। 


हरियाली बढ़ाने पर भी काम कर रही है संस्था : 
संस्था के सदस्य हरियाली बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। सभी सदस्य साथ मिलकर शहर के आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाना और नियमित उनके संरक्षण का कार्य भी करते रहते हैं। राजकमल और नीरव के अलावा नितेश अग्रवाल, अरविंद शर्मा, बीनू चतुर्वेदी और हरीश चतुर्वेदी भी नियमित रूप से अपनी सेवाएं देते हैं। 

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