तलैया काली मंदिर में सेवा करने वाला आसिफ, तालाब में कूदने वालों को जान पर खेलकर बचाता है

तलैया काली मंदिर के पास एक ऐसी जगह है, जहां लोग अक्सर तालाब में कूदकर जान देने की कोशिश करते हैं। ऐसे ही 7 लोगों को पिछले 12 सालों में अपनी जान पर खेलकर 23 साल के मोहम्मद आसिफ खान ने बचा लिया है। इसके अलावा ऐसे कई मामले हैं, जिनमें लोग तालाब में कूदने की फिराक में रहते हैं, लेकिन उनकी नियत का अंदाजा लगाकर आसिफ पास स्थित तलैया थाने के जवानों को सूचना दे देता है। 


तलैया से गिन्नौरी की तरफ आगे बढ़ते ही एक जगह सुसाइड प्वाइंट के रूप में बदनाम है। लोग यहां आकर पानी में छलांग लगा देते हैं और तालाब की गहराई ज्यादा होने के कारण डूब जाते हैं। ऐसे ही 7 लोगों को आसिफ पिछले 12 सालों में अपनी जान पर खेल कर बचा चुके हैं। अवसाद से घिरे ऐसे लोगों के लिए आसिफ एक फरिश्ते की तरह हैं, जो अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे हैं। 

प्रसाद और फूलों की दुकान चलाते हैं आसिफ :
आसिफ काली मंदिर पर पिछले 10 सालों से माता की चुनरी और फूलों की दुकान लगाते आ रहे हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में होने वाली घटनाओं पर वे बारीकी से नजर रखते हैं और किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर तुरंत उसे रोकने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसी तरह की एक घटना को याद करते हुए आसिफ बताते हैं कि उन्होंने 10 अप्रैल 2018 को छोटे तालाब में कूदे एक आदमी को अपनी जान पर खेल कर बचाया था। लेकिन इसके बावजूद उन्हें किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं मिला है।


आसिफ की पढ़ाई केवल पांचवी तक हुई है और वे पिछले 12 सालों से तैराकी कर रहे हैं। आसिफ के पिता नौशे खान एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वहीं आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण वे प्रसाद और चुनरी बेचकर अपने घर का खर्चा चला रहे हैं।

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मंदिर की सफाई भी करते हैं :
आसिफ रोजाना के काम-काज के साथ नियमित रूप से नमाज भी अदा करते हैं। दोपहर में मंदिर के बंद होते ही कई बार फर्श की धुलाई और सफाई भी आसिफ ही करते हैं। आसिफ के अनुसार जब वे लोगों के लिए चुनरी और प्रसाद की दुकान लगा सकते हैं, तो मंदिर की साफ-सफाई करने में भी उन्हें कोई हर्ज नहीं है।

आसिफ की इसी भावना आ आसपास स्थित सभी लोग सम्मान करते हैं। कई बार आसिफ को परेशानी में देख आसपास के लोग ही उसकी मदद करते हैं।

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खराब हो चुका है कीमती सामान :
तालाब में छलांग लगाने के कारण आसिफ का मोबाइल और काफी सामान भी खराब हो चुका है। डूबने वाले को बाहर निकालते समय उन्हें कई बार चोट भी लोग जाती है, लेकिन वो इसकी परवाह किए बगैर हर बार तालाब में डूबने वाले व्यक्ति की मदद करते हैं।

आसिफ बताते हैं तालाब में डूब रहा आदमी हिंदू है या मुसलमान, यह उनके लिए मायने नहीं रखता। आसिफ के मुताबिक किसी को भी संकट में देख उसकी जान बचाना वो अपना फर्ज समझते हैं। इसीलिए बिना कुछ सोचे समझे तालाब में कूद जाते हैं।

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