4 साल में 7 बच्चों का कराया बोनमेरो ट्रांसप्लांट, 70 बच्चों के लिए महीने में दो बार अरेंज करते हैं खून

लगभग 4 साल पहले थैलेसीमिया मेजर पीड़ित बच्चे के इलाज से अस्तित्व में आई रक्तधारा थैलेसीमिया सोशल वेलफेयर सोसायटी थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों का इलाज कर रही है। संस्था अब तक 7 बच्चों का बोनमेरो ट्रांसप्लांट करवा चुकी है। साथ ही इस बीमारी से पीड़ित 70 से ज्यादा बच्चों के लिए हर माह रक्त उपलब्ध करवा रही है।

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे को हर माह में दो बार रक्त की जरूरत होती है। साथ ही यह रक्त नवीन होना चाहिए। यानि इसे थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चे को चढ़ाने से पहले ही डोनेट किया जाना चाहिए। इसी कारण थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों को खून मुश्किल से मिलता है। कई बार खून के अभाव में बच्चों की जान भी चली जाती है। 


क्या है थैलेसीमिया मेजर : 
थैलेसीमिया मेजर एक वंशानुगत बीमारी है। यह बच्चों को तब हाेती है, जब बच्चे के माता-पिता दोनों ही थैलेसीमिया माइनर से पीड़ित हों। इस बीमारी के कारण बच्चों के शरीर में रेड ब्लड सेल्स नहीं बनती हैं। इस कारण तीन माह का होते ही बच्चे को रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

बच्चे को महीने में दो बार रक्त चढ़ाया जाता है और यह क्रम आजीवन चलता रहता है। लेकिन आजकल जीन थैरेपी और बोनमेरो ट्रांसप्लांट से इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। इन दोनों ही इलाज में काफी पैसे और बोनमेरो की जरूरत पड़ती है।


5 साल के तरुण के इलाज से अस्तित्व में आई सोसायटी :
यह सोसायटी 4 साल पहले दीपक परियानी के बेटे तरुण परियानी के इलाज से अस्तित्व में आई। तब कई सालों से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. राकेश गुलानी को इस सोसायटी का अध्यक्ष बनाया गया।

डॉ. गुलानी के नेतृत्व में ही पिता दीपक परियानी ने तरुण का सफल इलाज कराया। इस दौरान बहन तमन्ना ने भाई के लिए बोनमेरो डोनेट किया और 14 लाख रुपए खर्चकर सीएमसी वैल्लूर में तरुण का सफल इलाज किया गया।  


बच्चों को जीवन देने हर माह करते हैं रक्तदान कैम्प का आयोजन :

रक्तदान कैम्प का आयोजन किया जाता है। इस कैम्प में भोपाल, इंदौर के साथ मप्र के अन्य जिलों और उप्र, महाराष्ट्र और गुजरात तक के लोग आते हैं। इन सभी के माता-पिता अपने बच्चों के ठीक होने की आशा लिए सैकड़ों किमी का सफर तय कर हर महीने संत हिरदाराम नगर में लगने वाले इस कैम्प का हिस्सा बनते हैं। 


सावधानी से रोका जा सकता है थैलेसीमिया मेजर : 
थैलेसीमिया मेजर एक वंशानुगत बीमारी है। यदि माता पिता थैलेसीमिया माइनर हैं, तो थोड़ी सी सावधानी रख अपने बच्चे को थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित होने से रोक सकते हैं। डॉ. गुलानी के मुताबिक विशेषज्ञों की देखरेख में और कुछ दवाओं के सेवन से बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने से रोका जा सकता है। किंतु इसके लिए संतानोत्पत्ति से पहले माता पिता दोनों को ही एक टेस्ट के जरिए थैलेसीमिया माइनर की जांच करवा लेनी चाहिए। 

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