विश्व वेटलैंड डे आज : 2 दशकों में बड़ी झील का 70 फीसदी कैचमेंट एरिया खत्म, तालाब की हद भी 25 फीसद कम हुई

एक हजार साल से भी ज्यादा समय से भोपाल के लोगों की प्यास बुझाता आ रहा बड़ा तालाब अब तक की सबसे बुरी स्थिति में है। कभी 38 वर्ग किमी में फैली बड़ी झील का दायरा अब तेजी से कम होता जा रहा है। हाल ही में हुए सर्वे के मुताबिक झील अब केवल 31 वर्ग किमी में फैली हुई है। वहीं बड़ी झील का कैचमेंट एरिया जो कभी 361 वर्ग किमी में फैला था। उसके 70 फीसदी क्षेत्र पर अतिक्रमण हो चुका है।

इसी बड़े तालाब को
रामसर कन्वेंशन के अन्तर्गत अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त वेटलैंड का दर्जा प्राप्त है। रामसर साइट के रूप में दर्ज भोजवेटलैंड रामसर कन्वेंशन में 1206 क्रमांक पर दर्ज है। इतनी बड़ी वॉटर बॉडी हाेने के कारण ही इसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है।

ऐसे खत्म कर रहे हैं हम बड़े तालाब को : 
पिछले 2 दशकों में भोपाल की हरियाली को बार-बार विकास के नाम पर उजाड़ा गया, जिससे अछूता हमारा बड़ा तालाब भी नहीं रहा। 20 साल में हुए निर्माण कार्यों के कारण बड़ी झील का ग्रीन बेल्ट एरिया 70 फीसदी तक खत्म हो गया है।


वहीं लगभग 40 फीसदी कैचमेंट एरिया पर विभिन्न सरकारी और निजी इमारतें तान दी गई हैं। यहां तक की झील को भी नहीं बख्शा गया। झील के भीतर भी 25 फीसदी क्षेत्र को अतिक्रमणकारी खा गए हैं। 

यह भी पढ़ें : घने जंगल को खत्म कर सीपीए की सड़क बनाने की तैयारी, वाल्मी को एतराज

इन निर्माण कार्यों ने चीरा बड़े ताल का सीना : 
निजी अतिक्रमण : लालघाटी से लेकर सीहोर रोड तक बने हुए विभिन्न मैरिज गार्डन, चिरायु अस्पताल, वीआईपी रोड, राजा भोज सेतु, खानूगांव में किया गया अतिक्रमण, रिटेनिंग वॉल, तालाब के अंदर बनाई गई सड़क, सूरज नगर की सड़क और इसके आसपास निर्मित हो चुके फार्म हाउस, सैर सपाटा और इसी के आगे बने कई होटल्स।


इन सभी निर्माण कार्यों को बिना प्लानिंग के आकार दिया गया, जिससे राजधानी की हरियाली भी सिकुड़ गई। साथ ही बड़े तालाब का कैचमेंट एरिया, ग्रीन बेल्ट भी खत्म हो गया है। यदि इसी रफ्तार से झील के आसपास निर्माण कार्य होता रहा तो आने वाले दो दशकों में तालाब अपना अस्तित्व ही खो देगा। 

यह भी पढ़ें : मिसरोद में 70 से 200 साल पुराने 20 से ज्यादा पेड़, संरक्षित किए जाने की जरूरत

इतना खास है हमारे भोपाल का वेटलैंड : 

भोपाल की बड़ी झील और छोटी झील को भोजवेटलैंड के नाम से अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के वेटलैंड के रूप में मान्यता प्राप्त है। एक नजर डालते हैं इस वेटलैंड की खासियत पर 

- बड़े तालाब के तट पर 445.81 हैक्टेयर में फैला वन विहार नेशनल पार्क स्थित है, यहां कई वन्य जीवों का आवास है। 
- इस क्षेत्र में अब तक 200 प्रकार की जलीय वनस्पतियाें की खोज की जा चुकी है। 
- अब तक इस क्षेत्र में 179 प्रकार के पक्षियों की खोज की जा चुकी है, जिनमें से कई तो हर साल विभिन्न देशों और प्रदेशों से सैकड़ों मील की दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं। 
- यहां 105 प्रकार के जलीय जीव भी निवास करते हैं।
- 2007 में प्रोफेसर चक्रवर्ती के अध्ययन में बड़ी झील में 53 प्रकार की मछलियां पाई गई थीं।
- इसके अलावा यहां 5 प्रकार के कछुए, 10 प्रकार के रेप्टाइल्स भी इस क्षेत्र में निवास करते हैं। 

हजारों किमी की उड़ान भरकर आते हैं 20 हजार से ज्यादा परिंदे : 
अध्ययन के अनुसार हर साल इस क्षेत्र में औसतन 
20 हजार से ज्यादा पक्षी प्रवास पर आते हैं। जिनमें सफेद बगुले, काले बगुले, बार हैडेड गूज, स्पून, बिला, ब्राह्मणी शेल डक, सारस, बत्तख, बुलबुल, जलमुर्गी, नीलकंठ, मैना, तोता, बया, दूधराज, तीतर, कठफोड़वा, एशियाई पैराडाइस, फ्लाई कैचर, स्काई लार्क, वुड सेंडपाइपर, कबूतर, गलगल, फड़कुल, हार्नबिल, कौआ, कोयल और खंजन जैसे 179 प्रकार के परिंदे शामिल हैं। 

क्या होता है वेटलैंड : 
हमेशा पानी में डूबी रहने वाली जलमग्न जगह, आद्रभूमि या दलदल को ही वेटलैंड कहते हैं। प्रकृति द्वारा या मानव निर्मित स्थायी या अस्थायी, पूर्णकालीन आर्द्र अथवा अल्पकालीन जगह जहां पानी हमेशा या कुछ माह के लिए रहे। पानी साफ हो या गंदा, मीठा हो या खारा सभी तरह के पानी वाली जगहें वेटलैंड के अन्तर्गत आती हैं। 


पानी से घिरी दलदली वन भूमि, झाड़ियों से घिरे हुए दलदल, सड़े गले पेड़-पौधों वाली आर्द्रभूमि दलदल, नदी, झील, बाढ़ के क्षेत्र, बाढ़ वाले वन, समुद्री किनारे के झाड़ी युक्त स्थल डेल्टा, धान के खेत, मूंगे की चट्टानों के क्षेत्र, बांध, नहर झरने, मरुस्थली झरने, ग्लेशियर, समुद्री तट ज्वार-भाटे वाला स्थल आदि सभी आर्द्र क्षेत्र वेटलैंड कहलाते हैं। मछली पालने या जल संग्रहण के उद्देश्य से बनाए गए क्षेत्र भी वैटलैंड के अंतर्गत आते हैं। 

यह भी पढ़ें : भोपाल के 'रियल लाइफ मोगली', शाहनवाज, जो जंगली जानवरों का घर पर करते हैं इलाज

एक नजर रामसर कन्वेंशन पर :
ईरान के रामसर में 1971 में हुए एक समझौते को रामसर कन्वेंशन कहा जाता है। यह सभी देशों के वेटलैंड पर समझौते अथवा आपसी सूझ- बूझ का नाम है। रामसर कन्वेंशन के  सभी सदस्य देश अपनी सीमाओं के अंदर अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के सभी वेटलैंड की पारिस्थितिक गुणवत्ता बनाये रखने के अलावा अपनी वॉटर बॉडीज और वैटलेंट को प्रकृति के अनुकूल ही उपयोग कर सकेंगे। वर्तमान में 
राम सर कन्वेंशन के सदस्यों की संख्या 168 है। वहीं सभी देशों में मान्यता प्राप्त वेटलैंड की संख्या लगभग 2185 है।

 Latest Stories