शादी के लिए ई-इन्विटेशन यानी समय, पैसे और पर्यावरण की बचत

शादी में सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को कार्ड बांटने में आती है। कार्ड बांटने में जहां समय और पैसे की बर्बादी होती है। वहीं पर्यावरण का भी बहुत नुकसान होता है। ऐसे में आज के आईटी युग में शहर के जागरूक लोग लोगों को ई-इन्विटेशन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
ऐसे में शादी का कार्ड व्हाट्स एप या ई-मेल कर लोगों का समय तो बच ही रहा है। पेट्रोल, डीजल और किराये पर खर्च होने वाला पैसा भी बच रहा है। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण और पेड़ों की कटाई पर भी अप्रत्यक्ष तरीके से लगाम लग रही है।
सिंधी समाज में जागरूकता फैला रही सेवा संस्था :
सिंधु एजुकेशन वेलफेयर एसोशिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश केसवानी पिछले 5 सालों से पूरे प्रदेश की सिंधी पंचायतों से ई-इन्विटेशन समाज में लागू करने के लिए आग्रह कर रहे हैं। केसवानी बताते हैं कि शुरुआत में इसे लागू करवाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे धीरे समाज ने इसे समझना शुरू किया। इसके सुखद परिणाम आना भी शुरू हुए हैं।

(भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और संस्था सेवा के अध्यक्ष दुर्गेश केसवानी ई-इन्विटेशन अपनाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।)
केसवानी ने Agnito Today से बातचीत में बताया कि लोग अब मुझे भी व्हाट्स एप पर निमंत्रण भेज कर आमन्त्रित करते हैं। जिसकी मुझे बेहद खुशी होती है। सिंधी समाज के बाद अन्य समाज के लोगों को भी मैं ई-निमंत्रण के लिए जागरूक कर रहा हूं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनाएं। ताकि हम अपने पर्यावरण की सुरक्षा कर सकें।
बागमुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में कई सालों से चल रहा चलन :
होशंगाबाद रोड स्थित बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में कई सालों से ई-इन्विटेशन की पहल शुरू हो चुकी है। कॉलोनी के रहवासी बताते हैं कि हम कॉलोनी में हर साल पेड़ लगाते हैं, तो पेड़ों को कटने से रोकने के लिए भी पहल करेंगे। पेड़ों को सबसे ज्यादा कागज के लिए काटा जाता है। ऐसे में कार्ड की खपत कम करने के लिए ई-निमंत्रण एक अच्छा विकल्प है।

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