स्मृति वन पर वन मंडल का पहरा, एक्सपर्ट की राय गेट बंद न करें लगाएं अर्जुन के पेड़

भदभदा रोड पर भोपाल वन मंडल द्वारा बनाए गए स्मृति वन पर अब वन मंडल का पहरा है। यहां अंदर जाने के लिए अब वन विभाग से विशेष अनुमति लेनी होती है। उसके बाद ही अंदर जाया जा सकता है। गौरतलब है कि यहां पर शहर के 600 से भी ज्यादा परिवारों ने अपने परिजनों की याद में पौधे लगाए थे, लेकिन 7 वर्ष पूर्व हुई भारी बारिश के कारण यहां लगे 500 से ज्यादा पेड़ों को भारी हानि हुई थी।

वन विभाग द्वारा अपने दिवंगत परिजनों की याद में भदभदा रोड पर 2008 में स्मृति वन का निर्माण किया गया था। इस दौरान यहां नीम, पीपल, बांस, शीशम, गूलर और बरगद सहित कई प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। 7 वर्ष के अंतराल में इनमें से ज्यादातर पेड़ भी बन गए, लेकिन 2013-14 के दरमियान हुई अतिवृष्टि के कारण ज्यादातर पेड़ खत्म हो गए।


स्मृति वन पर दो वर्ष से है सख्त पहरा : 
इसके बाद यहां से पेड़ों की अवैध कटाई भी चर्चा का विषय बनी, जिसकी खबरें सामने आने के बाद इसे बंद कर दिया गया है। वन विभाग द्वारा पिछले 2 सालों से यहां सख्त पहरा लगाया गया है। यहां तक की आने जाने के सभी रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिसके बाद यहां पर लगे दिवंगत आत्माओं की याद में 100 पेड़ों को जलअर्पित करने परिजन नहीं आ सकते हैं।

जलभराव के बाद वनमंडल ने यहां पौधरोपण पर रोक लगा दी है। वहीं अतिवृष्टि से जो 500 पेड़ नष्ट हुए थे। उन्हें कटारा हिल्स पर बने स्मृति वन फेज-2 में पौधरोपण करने को कहा गया। हालांकि यहां अभी भी 100 से ज्यादा पेड़ लगे हुए हैं, जिन तक पहुंचने में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

सुरक्षा जरूरी लेकिन इतनी सख्त नहीं : 
पर्यावरणविद आनंद पटेल के अनुसार इस क्षेत्र को वन मंडल यदि चाहे तो एक सिटी फाॅरेस्ट के रूप में विकसित कर सकता है। इतने बड़े क्षेत्र में ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं, जो लंबे समय तक जलभराव के बावजूद भी बने रहें। वहीं जिन जगहों पर पानी नहीं भरता वहां पीपल, बरगद और नीम का सघन वन बनाया जाना चाहिए। 

(पर्यावरणविद आनंद पटेल के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में यूकेलिप्टस और अर्जुन के पौधों का पौधरोपण होना चाहिए। )

इससे आसपास के लोगों को साफ हवा भी मिलेगी और जगह का सदुपयोग भी होगा। वहीं यदि भविष्य में जलभराव भी होता है, तो ऐसे पौधे या पेड़ लगाए जाएं जो 4 से 5 फीट पानी भरने के बाद भी खराब न हों। ऐसे पौधों या पेड़ में यूकेलिप्टस और अर्जुन का पेड़ प्रमुख है। वहीं पीपल और बरगद भी यदि पूरी तरह से विकसित हो जाएं तो उन्हें भी किसी तरह की समस्या नहीं होगी। 

पेड़ों को दूर से ही देख कर लौट रहे हैं लोग : 


वहीं वन मंडल द्वारा मुख्य द्वार के पास बनी सीढ़ियों पर बबूल और अन्य सूखी झाड़ियां डाल दी गई हैं, जिससे लोगों को अंदर जाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोग अपनों की याद में लगाए गए पेड़ दूर से ही देख कर वापिस जा रहे हैं।

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