वन विभाग ने भोपाल के पास शुरू की टाइगर सफारी, जहां जटाओं के रूप में मौजूद है कैरी महादेव

जंगल और इसका मौन हम इंसानों को सदियों से ही आकर्षित करता आया है। हर व्यक्ति जो आज के तनाव भरे जीवन में जी रहा है, उन्हें जंगल की शांति हमेशा से ही अपनी ओर खींचती रही है। यदि यह जंगल शहर के पास हो तो किसी का भी मन यहां अक्सर जाने को करेगा। पेड़ों की सरसराहट, धीमी बहती पवन और जंगली जानवरों का कोलाहल मन में असीम शांति भर देगा। 

राजधानी भोपाल से लगभग 45 किमी की दूरी पर कोलार डैम रोड पर सदियों से स्थित झिरी वन्य क्षेत्र पर्यावरण प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। इसे रातापानी अभ्यारण्य के नाम से भी जाना जाता है। यहीं वन विभाग ने ईको टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से रातापानी सेंचुरी के बर्रूसोत और देलाबाड़ी की तर्ज पर झिरी में पर्यटन शुरू किया है।


नए पर्यटन स्थल को झिरी टाइगर सफारी का नाम दिया गया। हाल ही में कोलार डेम रोड पर पीएचई के फिल्ट्रेशन प्लांट के ठीक पास स्थित झिरी गेट से 36 किमी की टाइगर सफारी की जा सकती है। आंकड़ों की मानें तो दाहोद रेंज में स्थित इस क्षेत्र में 45 से अधिक बाघ विचरण कर रहे हैं। 

झिरी गेट से 12 किमी दूर है कैरी के महादेव : 
कोलार डेम रोड पर स्थित झिरी गेट से जैसे ही अंदर पहुंचते हैं, माहौल बिल्कुल बदल जाता है। जहां पीछे वाहनों का शोर सुनाई देता है, सामने की ओर जंगल की वादियां अपना आंचल फैलाए जैसे हमारा स्वागत करने को तैयार हैं। हालांकि जंगल के अंदर आने से पहले आपको टिकट लेना पड़ेगा। यहां स्थित ट्रैक आपको सीधे 12 किमी दूर कैरी महादेव तक ले जाएगा। 


उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते के दोनों ओर घना जंगल है। यहां चारों ओर सागौन और शीशम के पेड़ों का घना जंगल है। यहां दूर-दूर तक कोई भी आदमी दिखाई नहीं देगा। लगभग 12 किमी का सफर तय करने के बाद जैसे ही कैरी महादेव तक पहुंचेंगे। वन विभाग के कर्मचारी यहां तैनात हैं, जो जंगल में आने वाले हर व्यक्ति का टिकट चेक करके ही आगे जाने देते हैं।  

जटाओं के रूप में विराजित है महादेव : 
कैरी के महादेव एक ऐसा स्थान है, जहां महादेव किसी प्रतिमा के रूप में नहीं बल्कि जटाओं के रूप में विराजमान हैं। यहां स्थित एक वट वृक्ष से पूरे साल पानी की धार बहती रहती है। मान्यता है कि यहां स्नान के बाद मांगी गई मन्नत कभी विफल नहीं होती। कई सदियों से लोग यहां स्नान करने आते रहे हैं। 


मन्नत पूरी होने के बाद कई लोगों ने यहां स्वेच्छा से मंदिर निर्माण भी करवाए हैं। हालांकि वन विभाग जंगल की मर्यादा को बरकरार रखते हुए यहां पर किसी भी प्रकार के बड़े निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दे रहा है। यहां पिछले तीन दशकों से तपस्या कर रहे स्वामी हरिगिरी गोस्वामी को भी वन विभाग के कर्मचारी इस स्थान को छोड़ने को बोल चुके हैं। जिसकी आपत्ति वे यहां दर्शन को आने वाले हर श्रद्धालु से करते हैं। 

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कैरी के पेड़ के कारण हुए कैरी के महादेव : 
इस मंदिर से लगभग 100 फीट नीचे खाई में एक बहुत बड़ा आम का पेड़ स्थित है। हरिगिरी जी बताते हैं कि इसी आम के पेड़ के कारण इस स्थान का नाम कैरी के महादेव पड़ा। वे इस स्थान को एक सिद्ध स्थान बताते हुए कहते हैं कि यहां स्थित सात्विक शक्तियों ने कई माताओं को संतान और कई वर-वधुओं को योग्य जीवन साथी दिया है।


साथ ही वर्तमान और पूर्व सरकारों के कई विधायक और मंत्री कैरी के महादेव की कृपा से ही सत्ता का सुख भोग सके हैं। इन्हीं जटाओं के पास लोगों ने एक शिवलिंग भी स्थापित कर दिया है, जिसका अभिषेक यहां से निकलने वाली अविरल धारा से ही किया जाता है।  

आगे के 24 किमी में मौजूद है घना जंगल : 
यहां नहाने के बाद आगे की ट्रैकिंग का मजा लिया जा सकता है। आगे के 24 किमी की सफारी केवल चार पहिया वाहन से ही करने की अनुमति है। हालांकि किसी बड़ी 4 व्हील ड्राइव एसयूवी से इस सफर को किया जाए तो सफर ओर आरामदायक हो जाएगा। वन विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि इस क्षेत्र में वन्य जीवन अच्छी तरह से फल फूल रहा है।


कुछ समय पूर्व 
जारी लैंड स्कैप आंकड़ों में रातापानी सेंचुरी में 45 से अधिक बाघ होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा यहां पर तेंदुआ, चीतल, लंगूर, नीलगाय, चौसिंगा, काला हिरण, लगड़बग्घा, सियार और लोमड़ी सहित बड़ी संख्या में बंदर, लंगूर और कई तरह के सरिसृप भी मौजूद हैं। वन विभाग ने इस पूरे 36 किमी के ट्रैक को उन लोगों के लिए बनाया है, जो राजधानी से दूर किसी टाइगर रिजर्व में नहीं जा सकते हैं। 

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साधारण दर पर जंगल सफारी का मजा : 
इस जगह जाने के लिए कोलार डेम रोड झिरी द्वार से जा सकते हैं। हालांकि इस दौरान वाहन खुद का रहेगा। जिसमें झिरी से कैरी महादेव तक प्रति दो पहिया वाहन दो लोगों के साथ 50 रुपए और प्रति चार पहिया वाहन 6 लोगों के साथ 150 रुपए की दर तय की गई है। यदि झिरी से करमई तक का सफर तय करना चाह रहे हैं, तो प्रति चार पहिया वाहन 6 लोगों के साथ  750 रुपए की दर तय की गई है।


इस दौरान कैरी महादेव तक पैदल ट्रैकिंग भी की जा सकती है, लेकिन इस दौरान वन विभाग के एक व्यक्ति साथ रहेगा। इसके लिए केवल 12 रुपए की दर तय की गई है। 

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