मिलिए भोपाल के 'रियल लाइफ मोगली', शाहनवाज से, जो जंगली जानवरों का घर पर करते हैं इलाज

जंगली जानवरों का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे लोग डरने लगते हैं, लेकिन भोपाल के शाहनवाज खान इससे बिल्कुल अलग जंगली जानवरों का घर पर ही इलाज कर देते हैं। शाहनवाज ने Agnito Today से मुलाकात के दौरान बताया कि आखिर कैसे हुई उनकी जंगली जानवरों से दोस्ती...?

(बाघिन और दो शावकों की इस तस्वीर को शाहनवाज ने ही अपने कैमरे से क्लिक किया है)
सुबह के लगभग 4.30 बजे हुए हैं और दिसंबर की कड़क सर्द रात और चारों तरफ से आती सियारों के चीखने की आवाज। लेकिन इन सबसे भय मुक्त 46 साल के शाहनवाज खान बेखौफ होकर जंगल में ठहल रहे हैं। यह नजारा भोपाल से लगभग 350 किमी दूर बालाघाट के पास सिवनी के जंगलों का है। भोपाल निवासी शाहनवाज खान पिछले तीन दशकों से इसी तरह सुबह सुबह जंगल में ठहलने निकल जाया करते हैं और घंटों तक इसी तरह जंगल में ठहलते रहते हैं।

(जंगल में सुबह की सैर पर निकले हुए शाहनवाज)

शाहनवाज
बताते हैं कि बचपन में ही उनकी वाल्दा (मां) उन्हें अकेला छोड़ दुनिया से रुख्सत हो गईं। तब से ये जंगल ही उनकी मां हैं। इन्हीं की गोद में ही उन्हें जीवन जीने का उद्देश्य मिला और वे आज आयुर्वेद के डॉक्टर हैं। शाहनवाज के पास जड़ी बूटियों का इतना खजाना है कि उन्होंने इसी बलबूते मप्र के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमा भारती और बाबूलाल गौर के अलावा कई मंत्रियों और महामहिम राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़ तक का इलाज किया है। साथ ही मप्र सरकार भी इन्हीं उपलब्धियों के कारण उन्हें सम्मानित भी कर चुकी है।

(भोपाल के हाथीखाना स्थित अपनी क्लीनिक धनवंतरी पर शाहनवाज)

37.5 हैक्टेयर बंजर जमीन पर 5 साल में उगा दिया बेल का जंगल : 
शाहनवाज बताते हैं कि इस दौरान प्रदेश सरकार से बहुत सम्मान मिला, लेकिन मन में हमेशा ऐसा लगता था कि कुछ छूट रहा है। इसी कारण सिवनी वापस जाने का फैसला किया और जंगलों की गोद में जाकर बस गया। इसी दौरान घर के पास खाली बंजर जमीन पर फलदार वृक्ष लगाने की सोची। लेकिन हर बार लोग जंगल में आग लगा देते जिससे पौधे जलकर नष्ट हो जाते।

(इस जंगल को शाहनवाज ने ही कई सालों की मेहनत के बाद विकसित किया है)
इन लोगों को समझाया और फिर साथ में कुछ दोस्तों को जोड़ मिट्‌टी जैविक खाद और बीजों से सीड बॉल बनाई। धीरे धीरे 37.5 एकड़ में बेल के 50 हजार पौधे लगाकर जंगल विकसित कर दिया। जहां अब कई वन्य प्राणियों का बसेरा है, जिसमें बाघ और ब्लैक पैंथर भी शामिल है।

शाहनवाज और उनके साथी रात-रात भर जाग कर करते हैं जंगल की रखवाली :

शाहनवाज और उनके पांच साथी गुड्‌डू, कृष्णा, भूरू, ओमकार और संतोष जानवरों और जंगल की की सुरक्षा के लिए रात में बारी-बारी से जागकर चौकीदारी भी करते हैं। कई बार शिकारियों की जानकारी मिलने पर रात भर दो एसयूवी में सभी दोस्त पूरे जंगल की रखवाली करते रहते हैं। वहीं शाहनवाज की पत्नी तब्बसुम भी अपने पति के साथ अक्सर जंगली जानवरों को बचाने में लगी रहती हैं। साथ ही दो बेटियां और दो बेटे भी अपने पिता की ही तरह जंगल और जानवरों से बहुत प्यार करते हैं। 

(शाहनवाज के विकसित किए जंगल में हाल ही में यह ब्लैक पैंथर रहने आया है, जिसे प्यार से वे बघीरा बुलाते हैं)
सांझ के पेड़ को बनाया अपना सबसे अच्छा दोस्त :

शाहनवाज बताते हैं कि मां के जाने के बाद उन्होंने जंगल से दोस्ती की। यहां भी सांझ का एक पेड़ है, जिससे वे अपने दिल की सारी बातें करते थे। कई बार घंटों तक बैठकर इसके साथ बतियाते थे। जब रोना आता था तो इसे ही गले लगा लिया करते थे। शाहनवाज बताते हैं कि इसे गले लगाते ही मानो ऐसा लगता था कि जैसे इसने मेरे सारे दुख दर्द अपने अंदर खींच लिए और मुझे अपने सारी पॉजिटिव एनर्जी दे दी हो।
जंगलों से खोजीं 2256 प्रकार की दवाएं :

शाहनवाज बताते हैं कि जंगलों से इसी प्यार के कारण उन्होंने यहां औषधीय पौधों को खोजना शुरू किया। 15 साल की उम्र से शुरू किया गया यह काम अगले 20 सालों तक निरंतर चलता रहा। इस दौरान उन्होंने बीएससी से ग्रेजुएशन किया और आयुर्वेद में डॉक्टर की डिग्री ली। इसी दौरान उन्होंने 2256 प्रकार के पौधों को खोज निकाला जो किसी न किसी तरह के औषधीय गुण रखते हैं।

(इस जड़ी का नाम नाग दमनी है, जो नाग के काटने के इलाज में काम आती है)
उन्होंने इन सबको पहली बार कोच्चि में आयोजित वैश्विक आयुर्वेद प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया। बाद में इन्हीं जड़ी बूटियों का उपयोग पालतू जानवरों और फिर जंगली जानवरों और पक्षियों पर किया।
भालू से लेकर अजगर तक का कर चुके हैं इलाज :

शाहनवाज बताते हैं कि वे आज तक कई जंगली जानवरों का घर पर ही इलाज कर चुके हैं। इन जानवरों में भालू, हिरण, लोमड़ी और अजगर तक शामिल है। अजगर तो अब घर का सदस्य ही बन गया है। इसे कई बार जंगल में वापिस छोड़ा गया, लेकिन यह हर बार शाहनवाज के घर वापिस आ जाता है। साथ ही जंगली जानवर शाहनवाज को पहचानते भी हैं।

(इस अजगर का इलाज शाहनवाज  ने किया था, जो जंगल में छोड़ने पर फिर से लौटकर शाहनवाज के घर आ जाता है।)

वे मोर और हिरण के बिल्कुल नजदीक भी पहुंच जाते हैं, लेकिन वे डर कर नहीं भागते। यहां तक कि घर के पास रहने वाली एक बाघिन भी अपने दो शावकों के साथ अक्सर शाहनवाज के पास आकर बैठ जाती है।

पिछले 30 सालों से जंगली जानवरों से दोस्ती निभा रहे शाहनवाज की यह लाइफ हम लोगों के लिए भले ही खतरनाक हो, लेकिन शाहनवाज के लिए यह सब डेली लाइफ का एक हिस्सा है। अपनी जिंदगी को खतरे में डाल जंगल बचाने के लिए काम कर रहे शाहनवाज खान को हमारा सलाम...! 

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