मिसरोद में 70 से 200 साल पुराने 20 से ज्यादा पेड़, संरक्षित किए जाने की जरूरत

मिसरोद में 20 से ज्यादा पेड़ ऐसे हैं, जिनकी उम्र तकरीबन 70 से 200 साल के बीच है। हालांकि विकास के नाम पर समय-समय पर पेड़ों को काटा जाता रहा है, लेकिन ये पेड़ आज भी मिसरोद क्षेत्र की शान बढ़ा रहे हैं। इनमें से तीन पेड़ मिसरोद के मुख्य चौराहे पर भी स्थित हैं, लेकिन इनमें से कुछ को हाल ही में बिजली विभाग ने हाईटेंशन लाईन के नाम पर काट दिया है। 

मिसरोद में ज्यादातर लोग पाटीदार समुदाय के हैं। पाटीदार समुदाय ज्यादातर किसानी के पेशे से जुड़ा होता है। इसलिए पाटीदार समुदाय पेड़ों के संरक्षण को लेकर विशेष रूप से सक्रिय रहता है। हालांकि पिछले कुछ दशकों में यहां भी काफी पेड़ विकास के नाम पर काट दिए गए, लेकिन आज भी क्षेत्र में कई पेड़ ऐसे हैं, जिन्हें तीन या चार पीढ़ियां देख चुकी हैं। यहां के लोगों के अनुसार इन सभी पेड़ों को संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन पेड़ों के नीचे खेल सकें। 

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200 साल पुराने बरगद के पेड़ के नीचे ही आशियाना : 
मिसरोद क्षेत्र में सबसे पुराना बरगद का पेड़ राम नारायण पाटीदार 'नेताजी' के खेत की शोभा बढ़ा रहा है। नेताजी बताते हैं कि उनका बचपन इस पेड़ के नीचे बीता। उनके बेटे और पोते भी इसी के नीचे खेल कर बड़े हुए हैं। नेताजी के अनुसार ये कम से कम 200 साल पुराना है।

वहीं उन्होंने मिसरोद की जमीन को बेचकर बुधनी में जमीन लेकर बड़े पैमाने पर किसानी शुरू की है, लेकिन मिसरोद की कुछ जमीन इस बरगद के पेड़ के कारण नहीं बेची। 

तालाब के पास 100 साल पुराने दो पेड़ : 
वहीं मिसरोद के मुख्य तालाब के सामने दो पेड़ स्थित हैं, जिनमें से एक बरगद का और एक पीपल का बताया जाता है। यहां भी तालाब के सौंदर्यीकरण और सीसी रोड के कारण दोनों ही पेड़ों को नहीं काटा गया। यहां के रहवासी नियमित रूप से दोनों पेड़ों की पूजा अर्चना करते रहते हैं। इन दोनाें पेड़ों में से बरगद का पेड़ ज्यादा पुराना बताया जाता है। 

रामलीला मैदान में स्थित हैं दो पुराने पेड़ : 
वहीं रामलीला मैदान में भी दो पुराने पेड़ स्थित हैं। यहां बरगद का पेड़ सौ साल पुराना बताया जाता है, जो एक सदी से इस मैदान पर होने वाले यज्ञ और रामलीला के आयोजनों का साक्षी बताया जाता है। यहां के बुजुर्ग ओम पाटीदार बताते हैं कि जब भी रामलीला या किसी यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन यहां के लाेग करवाते हैं तो इसी पेड़ के नीचे आयोजन संपन्न होता है। 

साथ ही एक पीपल का पेड़ इस के सामने स्थित है, जिसकी नियमित पूजा अर्चना यहां के लोगों द्वारा की जाती है। 

चौराहे पर स्थित हैं कई पेड़ : 
वहीं पीपल और बरगद के कई पेड़ यहां के मुख्य चौराहे पर स्थित हैं, जिनके नीचे कई दशकों से बुजुर्गों की बैठक चली आ रही है। ओम पाटीदार बताते हैं कि किसानी खत्म होने के बाद सभी लोग इसी पेड़ के नीचे बैठकर घंटों तक बतियाते रहते थे। यही क्रम आज भी चला आ रहा है। शाम होते ही कई लोग इस पेड़ के नीचे बैठकर बतियाते रहते हैं।
वहीं हाल ही में बिजली विभाग द्वारा दो पेड़ों को काट दिया गया है, जिसको लेकर रहवासियों में काफी रोष है। लोगाें के अनुसार हाई टेंशन लाइन के नाम पर दोनों पेड़ों को काट दिया गया है।

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