भोपाल के पीएन केवाले ने 47 साल में 4000 से ज्यादा मृतकों के लिए दान की दाह संस्कार की सामग्री

रात के लगभग 9 बजे का समय, नेहरू नगर निवासी 76 साल के पीएन केवाले के घर की फोन की घंटी बजती है। इस समय भोजन कर रहे केवाले उठकर फोन उठाते हैं। सामने से एक व्यक्ति दर्द भरी आवाज में बोलता है, "हेलो! मेरी मां का अचानक देहांत हो गया है और मेरे पास उनका अंतिम संस्कार करने के लिए पैसे नहीं हैं। क्या आप मुझे अंतिम क्रिया की सामग्री उपलब्ध करवा सकते हैं।"

पीड़ित इससे पहले कुछ बोले केवाले उससे पहले ही उसे ढांढस बंधाते हुए कहते हैं, "बेटा जो आया है। उसे एक न एक दिन जाना ही होगा। तुम अपने आप को संभालो और सुबह 7 बजे आकर पूरी सामग्री ले जाना। मैं अभी निकाल कर रख देता हूं।" कुछ इसी तरह की घटनाओं के साथ 47 साल से पीएन केवाले की दिनचर्या बीतती है।

35 साल तक अकेले ही करते रहे सेवा : 
वे बताते हैं कि सर्दी, गर्मी हो या बारिश। पिछले
 
47 सालों से एक दिन छोड़कर किसी न किसी का अंतिम संस्कार उन्होंने किया ही है।करीब 35 सालों तक उन्होंने अकेले ही इस काम को किया। कारण कोई भी है यानि व्यक्ति गरीब, असहाय हो या फिर मृतक का कोई वारिस न हो। अंतिम क्रिया का सामान लेने के लिए कोई भी व्यक्ति श्री केवाले के घर या दुकान पर जा सकता है।


लगातार बढ़ती महंगाई और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ देने के लिए उन्होंने 2008 में स्वर्ग आश्रम सेवा समिति का निर्माण किया। इस दौरान किसी-किसी महीने तो उन्होंने
 
15 से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार किया है। उनके इस काम में उनके परिवार ने हमेशा सहयोग किया।

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एक गरीब ने बदल दिया जिंदगी जीने का तरीका : 
केवाले बताते हैं कि करीब 47 साल पहले न्यू मार्केट स्थित उनकी दुकान नामदेव पूजन सामग्री पर एक गरीब व्यक्ति ने उन्हें अपनी गरीबी और मां की मौत का हवाला देते हुए सहायता मांगी। उस दौर में वे रोजाना 20 से 25 रुपए ही कमा पाते थे। लेकिन गरीब की पीड़ा को देख उन्होने आसपास के लोगाें से उसके लिए मदद मांगी।


लेकिन इस दौरान पास स्थित एक दुकान मालिक ने उन्हें खूब खरीखोटी सुनाई। इससे केवाले इतने दुखी हुए कि गल्ले में पड़े तकरीबन डेढ़ सौ रुपए उस गरीब को दे दिए। इस घटना के बाद उन्होंने गरीबों और लावारिस मृतकों के अंतिम संस्कार को एक मिशन के रूप में लिया।

कोविड के दौरान भी करते रहे लोगों की सेवा : 
वे बताते हैं कि पिछले 47 सालों में अंतिम संस्कार करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं आई, लेकिन जगह की कमी उन्हें पिछले 5 सालों से परेशान कर रही है। वहीं कोविड के बाद उनकी समिति को हर साल मिलने वाला फंड भी बंद हो गया है, जिसके कारण भी उन्हें परेशानी आ रही है। इस कारण वे वर्तमान में केवल अत्यधिक जरूरतमंद लोगों की ही सहायता कर पा रहे हैं।


कोविड
के दौरान भी केवाले की सेवा निरंतर जारी रही। इस दौरान उनके पास जो भी व्यक्ति गया। उन्होंने उसे जरूरत का हर सामान समय पर उपलब्ध कराया। 

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अंतिम समय में किसी से भी घृणा न करें : 
केवाले बताते हैं कि जब उन्होंने यह काम करना शुरू किया था तो कुछ लोगों ने उनका बहुत विरोध किया, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। केवाले के अनुसार आजकल जिस तरह से लोग समाज से कटते जा रहे हैं और अकेले जीवन बिता रहे हैं। ऐसे लोग भविष्य में अंतिम संस्कार करने में परेशान होंगे। 


इसीलिए लोगों को ऐसे समय में गरीब मृतक से घृणा करने की बजाय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करना चाहिए।
 जिससे लोगों में इस काम के प्रति भी जागरुकता आए। 

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