"रजी अली बेग" ने की थी भोपाल में बॉडी बिल्डिंग की शुरुआत, भटके युवाओं को दिखाते थे सही रास्ता 

भोपाल में बॉडी बिल्डिंग की शुरुआत भले ही बुधवारे के गैलार्ड जिम से मानी जाती हो, लेकिन इसे आगे बढ़ाने का श्रेय यदि किसी को दिया जाना चाहिए, तो वो छोला स्थित भोपाल हेल्थ क्लब को दिया जाना चाहिए। भोपाल हेल्थ क्लब की स्थापना रजी अली बेग ने की थी। इस दौरान उन्होंने न केवल इस खेल को आगे बढ़ाया, बल्कि समाज को सुधारने का भी कार्य किया।

(राजनीति में भी बेग का अच्छा खासा दखल था। पहले चित्र में जवानी के दिनों में भाजपा के बाबूलाल गौर और ओम यादव के साथ, दोनाें ही भाजपा नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं। वहीं दूसरे चित्र में ओम यादव के साथ, वहीं तीसरे चित्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ चर्चा करते हुए। आखिर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ रजी अजी बेग )

बेग ने अपना पूरा जीवन खेल को समर्पित कर दिया। जीवन के 6 दशक बॉडी बिल्डिंग को दिए। इस दौरान कई भटके हुए युवाओं को गलत रास्ते से निकाल कर बॉडी बिल्डिंग और पावर लिफ्टिंग से जोड़ा। इस दौरान उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बतौर कोच अपनी सेवाएं भी दीं। बेग पिछले साल 28 दिसंबर को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन अपने पीछे एक लंबा-चौड़ा इतिहास छोड़ गए।

खून में ही थी पहलवानी : 


यूपी के रहने वाले बेग की पारिवारिक पृष्ठभूमि पहलवानी की रही है। इस कारण बेग भी 5 साल की छोटी उम्र में ही पिता और दादा के साथ अखाड़े में उतर गए थे। हालांकि उन्होंने बॉडी बिल्डिंग को अपनी मंजिल बनाया। इस दौरान मप्र इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में रहते हुए बॉडी बिल्डिंग और कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। 

समय के साथ साथ उन्होंने वेट लिफ्टिंग, पॉवर लिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग में भी मजबूत पकड़ बनाई और लगातार खेल के साथ जुड़े रहे। बाद में बेग कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं देने लगे। इस दौरान वे लगातार भोपाल जिम में युवाओं को तैयार करने का काम करते रहे। 

1960 में शुरू किया था भोपाल हेल्थ क्लब :


बेग ने 1960 में छोले पर भोपाल हेल्थ क्लब की शुरुआत की थी। इस दौरान खुद भी यहीं बॉडी बिल्डिंग की तैयारी करते थे और अन्य युवाओं को भी तैयारी करवाते थे। इस दौरान उन्होंने समाज से भटक चुके कई युवाओं को अपने साथ जोड़कर पॉवर लिफ्टिंग से जोड़ा। बाद में यहीं पर महिलाओं के लिए भी जिम की शुरुआत की। 

कोई भी टाइटल लाओ आजीवन फीस माफ : 

बेग ने आजीवन अपने जिम की फीस बेहद कम रखी, ताकि गरीब लोग भी सेहत के साथ साथ खेल में अपना कैरियर बना सकें। इतना ही नहीं यदि कोई युवा एक भी मेडल जीत कर आ जाता, तो बेग उसकी आजीवन फीस माफ कर देते थे और साथ ही ज्यादा मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। 

यही कारण रहा कि कई युवा खेल के साथ साथ नौकरी की भी तैयारी करते और उन्हें काफी अच्छे परिणाम भी मिलते। गरीब घर के लड़कों को बेग के साथ एक मकसद मिला और उन्होंने खेल के साथ नौकरी के लिए भी तैयारी करना शुरू कर दी। आज ऐसे कई लोग हैं, जो बेग के कारण अपने जीवन को सही दिशा में ले गए हैं।

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